Sunday, March 25, 2018

محفلِ حمد و نعت ادارہ، عالمی بیسٹ اردو پوئیٹری کی پیشکش پروگرام نمبر 145






हिंदी रिपोर्ट । शमसुल हक़ नातिक लखनऊ भारत

🥗महफिल ए हमद व नात ☘

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आज के तरक़्क़ी याफ़्ता दौर में बरकी़ तरसील ने हमारी  ज़िंदगी को जितनी तेज़ ऱफ्तारी बख़्शी है वह पहले कभी देखने में नही आई तरसील व अब्लाग़ के अमल को जो बर्क़ ऱफ्तारी बख़्शी  है इस से दूर दराज़ के इलाक़ों को करीब तर होने का एहसास पैदा कर दिया है। लोग फेसबुक वाट्सअप ट्यूटर और इंस्टाग्राम के ज़रिये पूरी दुनिया मे एक दूसरे से जान पहचान बना रहे हैं और अपने पैगामात भेज रहे हैं। 
🌱इदारा बेस्ट उर्दू पोइट्री 🌱
एक ऐसा ही इदारा है जिसने इस सिस्टम से फायदा उठा कर दुनिया भर के मुसन्निफ़ीन उदबा व शोरा ए  इकराम को एक प्लेटफार्म पर इकट्ठा किया है और उनके लिए नए नए अछूते और मुन्फ़रिद प्रोग्राम मुनअक़िद करा रहा है इस बार भी 24―3―2018 शनिवार के दिन अपने आप मे एक इंफ्रादियत लिए हुए 145 वां पुर नूर व रूह अफ़ज़ा प्रोग्राम 'महफिले हम्द ओ नात' का इनअक़ाद किया गया जिस की खासियत ये रही कि इस प्रोग्राम में शोअरा ने अपने हम्दिया व नातिया कलाम पेश किए वह न सिर्फ उर्दू रसमुल खत में थे बल्कि सभी कलाम हिंदी (देव नागरी) में भी पेश किए गए जिस से उनके कलाम को हिंदी दाँ तबक़े तक भी रसाई होगी। 
प्रोग्राम पाकिस्तानी समय के अनुसार शाम 7 बजे और भारतीय समय के अनुसार शाम 7:30 बजे शुरू किया गया प्रोग्राम की एक ख़ास बात ये भी रही कि इस से पहले बा क़ायदा कोई लिस्ट तैयार नहीं की गई थी कि किस किस शायर को अपना कलाम पेश करना है बल्कि समय पर जो शायर भी आन लाइन मौजूद थे उन्ही के नाम प्रोग्राम में शामिल किए गए और नाकि़दीन ने आन लाइन रह कर कुछ शोअरा के कलाम पर तनक़ीद की और अदबी गलतियों और अच्छाइयों पर खुल कर बात की और अपनी क़ीमती रायों का इज़हार किया 
प्रोग्राम के ऑर्गनाइज़र माननीय अर्सलान फ़ैज़ खोखर पाकिस्तान से थे जबकि प्रोग्राम का आईडिया तौसीफ तरनल साहब बानी व चेरमैन इदारा हाज़ा का था। इस पुर वक़ार महफ़िल के मनसबे सदारत पर माननीय शमसुल हक़ साहब (लखनऊ भारत )जलवा अफ़रोज़ थे जबकि निज़ामत को मुश्तरका तौर पर माननीय मुख्तार तलहरी साहब भारत और माननीय ज़िया शादानी साहब भारत कर रहे थे
इस पुर नूर महफ़िल के मेहमानाने ख़ुसूसी मोहतरमा समीना गुल साहिबा व माननीय आमिर हसनी साहब मलेशिया से थे जबकि मेहमाने ऐज़ाज़ी माननीय अकी़ल जज़्बी साहब पाकिस्तान व माननीय ज़हीर अहमद ज़िया साहब आज़ाद कश्मीर और माननीय शाहिद रहमान साहब पाकिस्तान से रहे। 
रिपोर्ट को उर्दू में डा सिराज गुलावठवी साहिब इन्डिया ने जबकी हिंदी में जनाब शमसुल हक़ लखनऊ ने टाईप किया ये मुशायरा शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक बहुत कामयाबी और अच्छे अंदाज़ के साथ चला नाकि़दीन ने कुछ के कलाम पर अपनी राय पेश की जबकि सामईन ने सभी को दिल खोल कर दाद व तहसीन से नवाज़ा
आप लोगों की दिल चस्पी के लिए सभी शामिले मुशायरा शायर का नमूना कलाम हाज़िर है

माननीय शमसुल हक़ नातिक साहब लखनऊ भारत 

मदीने से आया जो झोंका हवा का
वह पैग़ाम लाया नबी मुज्तबा का
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माननीय आमिर हसनी साहब मलेशिया

हर घड़ी आप के दरबार से खुशबू आये
एक इक हर्फ़ से गुफ्तार से खुशबू आये
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माननीय अक़ील जज़्बी साहब पाकिस्तान 

मूसा, ईसा हैं ख़लील और ज़बीह उल्लाह भी
आप सा देखा नहीँ राज दुलार मैं ने
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माननीय ज़हीर अहमद ज़िया साहब आज़ाद कश्मीर

तेरी हसरत में तिरे मस्त ख्यालों में रहे
तेरा ये बन्दा तिरे चाहने वालों में रहे
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माननीय मुख़्तार तलहरी साहब भारत

आली है तू वाली है 
तेरी शान निराली है
मैं हूँ आसी और तिरी 
हस्ती रहमत वाली है
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मोहतरम डॉ सिराज गुलावठवी साहब भारत

तारीफ सब हैं तेरी
तू रब है आल्मों का 
रहमान भी है तू ही
ज़ाते रहीम यकता

इस हम्द के पहले मिसरे पर अपनी तनक़ीदी नज़र डालते हुए माननीय ज़िया शादानी साहब ने फ़रमाया की ,तारीफ़ सब हैं, यहां ,तारीफ़ वाहिद का सीगा़ है जबकि ,हैं, जमा का सीगा़ है वाहिद के सीग़े के साथ जमा का सीगा़ मुनासिब नहीं जबकि माननीय शमसुल हक़ साहब लखनऊ ने कहा कि मुझे इस कलाम में कोई मक़ामे मशविरा नज़र नही आया क्योंकि तारीफ के साथ लफ़्ज़े ,सब, जमा की तरफ इशारा करता है और इस तरह बहुत मुस्तामल है
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माननीय अरशद मीना नगरी साहब भारत 

ज़ुल्म का राज चार सू 
आंख नम नज़र लहू लहू
काम हो रहा वह रु बरु

कह चुके जो बात मुस्तफ़ा 
फखरे कायनात मुस्तफ़ा
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माननीय अलीम ताहिर साहब भारत

है आता करदा फ़िकरो फ़न तेरा
शुक्र करता है अदा मन तेरा

एक कुन से किया जहां तख़लीक़ ये ज़मीं तेरी ये गगन तेरा

इस हमद पर मोहतरम ज़िया शादानी साहब ने मिसरा ,शुक्र करता है अदा मन तेरा , पर अपनी तनक़ीदी राय पेश करते हुए यूँ फ़रमाया की ये मिसरा अगर ऐसे ,शुक्र करता है यूँ भी मन मेरा, कर लिया जाए तो बहुत मुनासिब रहे
मिसरा,, खींचता है मुझे अपनी जानिब ,को मुझे तेरी जानिब कर लिया जाए और, विर्द करती हैं फिजायें ताहिर को ,विर्द करती है ये फ़िज़ा ताहिर, कर लिया जाए तो अशआर का हुस्न निखर जाए
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माननीय शाहीर तहामी साहब पाकिस्तान 

चमकती धूप और साया
ये सहरा तिशनगी पानी
हिसारे ज़ात में तेरे 
ये सब कुछ है तो क्यों फा़नी
रामूज़े इश्क़ का मस्दर 
ख़िरद ज़ादे हुनर तू है
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माननीय गुलाम अहमद रज़ा क़ादरी मेहदी रामपुरी
भारत

नबी के रोज़े की जाली को थाम कर मेहदी
मैं अपना सोया मुक़द्दर जगाने आया हूँ
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माननीय मुस्तफ़ा दिलकश साहब महाराष्ट्र  भारत

फूलों को खिला दे पत्थर में शाखों को फल दे अल्लाह
धरती को जल थल कर दे इतना तो जल दे अल्लाह
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मोहतरमा सबीहा सदफ़ सिद्दीक़ी साहिबा भोपाल भारत

इंतिहा तू ही इब्तिदा तू ही
मेरे हर दर्द की दवा तू ही
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माननीय इब्ने रब्बानी साहब पाकिस्तान

हां अहसने ताक़वीम की तफ़्सीर वह चेहरा
गुलज़ारे बहिशती की है तस्वीर वह चेहरा
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माननीय असग़र शमीम साहब कलकत्ता भारत
 मदीने की गलयों में घर चाहता हूं 
वह रोज़ ए अक़दस का दर चाहता हूं

दूसरे मिसरे में रोज़ा ए अक़दस को मोहतरम मुख़्तार तलहरी साहब ने गौ़र करने का मशवरा दिया

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माननीय ख़ालिद सरुही साहब पाकिस्तान 

अपने दर पर अब बुला लीजिये
जी मचलता है देखूं तुम्हारा नगर
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मोहतरमा नय्यर रानी शफ़क़ साहिबा पाकिस्तान

दीदार की प्यासी हूँ दीदार आता आक़ा
हर सिम्त अंधेरे हैं थोड़ी सी ज़िया आक़ा
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माननीय शोज़ेब काशिर साहब आज़ाद कश्मीर

तू सैय्यदे आलम है राफा़अना लका ज़िकरक
प्यारे तुझे क्या ग़म है राफा़अना लका ज़िकरक

इस नात में हुज़ूर अकरम स,अ, व, को तू कह कर मुखताब किया गया है इस तरफ नाकिद ने इशारा किया
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मोहतरमा सीमा गौहर साहिबा रामपुर भारत  

सिर्फ उस रब से मोहब्बत कीजिये
जितना मुमकिन हो इबादत कीजिए
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माननीय मतीन तालिब साहब नंदोरा भारत

मैं सरशार हूँ इश्क़ में मुस्तफ़ा के 
कि बख्शिश की सूरत निकलने लगी है
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माननीय मुक़ीम मीना नगरी भारत

सुबह हुई तो सारे परिंदे विर्द करें तेरा
आती जाती सांस सांस से जिक्र चले तेरा
तू ही खुदा है तू ही खुदा तू ही खुदा मेरा
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माननीय अर्सलान फ़ैज़ खोखर साहब पाकिस्तान

अब आ रही फिर मुझे खुशबू गुलाब की
दहलीज़ पर खड़ा हूँ रिसालत मआब की
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माननीय इरशाद अहमद खान साहब महाराष्ट्र इंडिया 

ख़ुश हो के पत्तों ने ताली बजाई
खुश्बू भी फूलों ने मिलकर लुटाई
अज़कार करते हवा गुनगुनाई

सबके लबों पर तिरा ज़िक्र या रब
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मुशायरा रात 11 बजे तक बहुत आब व ताब व बशाशत के साथ चलता रहा आखि़र में नाकि़द वे उस्ताद शायर माननीय ज़िया शादानी साहब ने हमदिया व नातिया कलाम पर तनक़ीद के सिलसिले में फ़रमाया कि हमदिया व नातिया कलाम में तनक़ीद कोई मायने नही रखती इस मे दो बातों का ख्याल रखें मफ़हूम के ऐतबार से तो शायर आज़ाद है कि वह अपनी मर्ज़ी से क्या कहता है लेकिन बहर की लिहाज़ ज़रूरी है कि मिसरा बहर में हो 
2 एहतराम के दायरे से बाहर न निकलें 
इसके बाद सदरे महफ़िल मोहतरम शमसुल हक़ साहब लखनवी ने अपने खिताब में फ़रमाया

             ,बिस्मिल्लाह,

आज का मुशायरा ब उनवाने माफ़िले हम्द व नात खत्म हुआ जिसे ऑर्गनाइज़ कर रहे थे माननीय अर्सलान फ़ैज़ साहब

निज़ामत कर रहे थे जनाब मुख्तार तलहरी साहब व जनाब ज़िया शादानी साहब
बहुत शानदार और बहुत पु रौनक़ रहा ला जवाब कलाम सुन ने को मिले उमदा निज़ामत रही और हमारे मेहमाने ख़ुसूसी हों या मेहमाने ऐजाज़ी सभी ने शोअरा को खूब सराहा 

मैं आखि में सब को मुबारकबाद पेश करता हूँ औऱ इस इदारे और तमाम कारकुनान के लिए दुआ भी करता हूं
आईये इख़्तितामे मजलिस पर चन्द दुआ बार गाहे रब्बे अज़ीम के हुज़ूर में मांगते हैं
की ऐ अल्लाह हमारी तमाम कविशों को क़बूल फरमा हमारी कोताहियों को माफ़ फरमा 
हमें सआदते दारैन से हमकिनार फरमा
ऐ अल्लाह अपनी मोहब्बत और रसूल की सच्ची मोहब्बत आता फरमा
इल्म और अमल में और ज़िन्दगियों में बरकत आता फरमा आमीन 
या रब्बल आलमीन

मिंजानिब ,सदरे मुशायरा

इसी के साथ बानी व चेयरमैन इदारा आलमी बेस्ट उर्दू पोइटरी  मोहतरम तौसीफ तरनल साहब ने मुशायरा ख़त्म होने का ऐलान किया

माननीय डॉ सिराज साहब गुलाओठी साहब की उर्दू रिपोर्ट की हिंदी टाइपिंग 
हिंदी रिपोर्ट शमसुल हक़ लखनवी

رپورٹ - ڈاکٹر سراج گلاؤٹھوی انڈیا 

🌸'محفلِ حمد و نعت '🌺
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آج کے ترقّی یافتہ دور میں برقی ترسیل نے ہماری زندگی کو جتنی تیز رفتاری بخشی ہے وہ پہلے کبھی دیکھ نے میں نہیں آئی، ترسیل و ابلاغ کے عمل کو جو برق رفتاری بخشی ہے اس سے دور دراز کے علاقوں کو قریب تر ہونے کا احساس پیدا کردیا ہے لوگ فیس بک، واٹس ایپ، ٹیوٹر اور انسٹاگرام کے ذریعے پوری دنیا میں ایک دوسرے سے جان پہچان بنا رہے ہیں اور اپنے پیغامات ترسیل کر رہے ہیں "ادارہ بیسٹ اردو پوئیٹری "ایک ایسا ہی ادارہ ہے جس نے اس سسٹم سے فائدہ اٹھاکر دنیا بھر کے مصنفین، ادباء و شعراء اکرام کو ایک پلیٹ فارم پر جمع کیا ہے اور ان کے لئے نئے نئے اچھوتے اور منفرد پروگرام منعقد کرا رہا ہے، اس مرتبہ بھی 24-3-2018 بروز ہفتہ اپنے آپ میں انفرادیت لئے ہوئے 145 واں پرُنور و روح افزا پروگرام"محفلِ حمد و نعت "کا انعقاد کیا گیا جس کی خاصیت یہ رہی کہ اس پروگرام میں شعراء نے اپنے حمدیہ و نعتیہ کلام پیش کئے وہ نہ صرف اردو رسم الخط میں تھے بلکہ سبھی کلام ہندی( دیوناگری )رسم الخط میں بھی پیش کئے گئے جس سے ان کے کلام کو ہندی داں طبقے تک بھی رسائی حاصل ہوسکتی ہے پروگرام پاکستانی وقت کے مطابق شام 7 بجے اور ہندوستانی وقت کے مطابق 7-30 بجے شام کو شروع کیا گیا پروگرام کی ایک خاص بات یہ بھی رہی کہ اس کی پہلے سے باقاعدہ کوئی لسٹ تیار نہیں کی گئی تھی کہ کس کس شاعر کو اپنا کلام پیش کرنا ہے بلکہ بر وقت جو شاعر موجود تھے ان ہی کے نام پروگرام میں شامل کئے گئے اور ناقدین نے آن لائن رہ کر کچھ شعراء کے کلام پر تنقید بھی کی اور ادبی معائب و محاسن پر بغیر کسی تفریب کے کھل کر بات کی اور اپنی اپنی آراء کا اظہار کیا، پروگرام کے آرگنائزر محترم ارسلان فیض کھوکھر صاحب پاکستان تھے جبکہ پروگرام کا آئیڈیا محترم توصیف ترنل صاحب بانی و چیئرمین اداروں ھز'ہ کا تھا- اس پروقار محفل کے منصبِ صدارت پر محترم شمس الحق صاحب لکھنؤ انڈیا جلوہ افروز تھے جبکہ نظامت کے فرائض مشترکہ طور پر محترم مختار تلہری صاحب انڈیا و محترم ضیاء شادانی صاحب انڈیا نے انجام دئے - محفل پر نور کے مہمانانِ خصوصی محترمہ ثمینہ گل صاحبہ پاکستان و محترم عامر حسنی صاحب ملیشیا تھے جبکہ مہمانانِ اعزازی محترم عقیل جزبی صاحب پاکستان و محترم ظہیر احمد ضیا صاحب آزاد کشمیر اور محترم شاہد رحمان صاحب پاکستان تھے رپورٹ کا ہندی ترجمہ محترم شمس الحق صاحب لکھنؤ انڈیا نے تیار کیا-یہ مشاعرہ شام 7- بجے شروع ہو کر رات 11 بجے تک بہت کامیابی اور خوش اسلوبی کے ساتھ چلا ناقدین نے کچھ کے کلام پر اپنی رائے پیش کی جبکہ سامعین نے سبھی کو دل کھول کر داد و تحسین سے نوازہ - قارئین کی دلچسپی کے لیے سبھی شرکاء مشاعرہ کا نمونہ کلام حاضر ہے 

محترم شمس الحق ناطق صاحب لکھنؤ انڈیا 

مدینے سے آیا جو جھونکا ہوا کا
وہ پیغام لایا نبی مجتبی'کا
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محترم عامر حسنی صاحب ملیشیا 

ہر گھڑی آپ کے دربار سے خوشبو آئے
ایک اک حرف سے گفتار سے خوشبو آئے 
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محترم احمد عقیل جزبی صاحب پاکستان 

موسی' و عیسی' ہیں خلیل اور ذبیح اللہ بھی
آپ سا دیکھا نہیں راج دلارا میں نے 
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محترم ظہیر احمد ضیاء صاحب آزاد کشمیر 

تیری حسرت میں ترے مست خیالوں میں رہے
تیرا یہ بندہ ترے چاہنے والوں میں رہے
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محترم مختار تلہری صاحب انڈیا 
حمد
عالی ہے تو والی ہے 
تیری شان نرالی ہے 
میں ہوں عاصی اور تری
ہستی رحمت والی ہے
نعت
دونوں جہان پر ہے شہِ دو سرا کے ہاتھ
ہیں کس قدر بلند رسولِ خدا کے ہاتھ
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محترم ڈاکٹر سراج گلاؤٹھوی صاحب انڈیا 

تعریف سب ہیں تیری 
تو رب ہے عالَموں کا
رحمان بھی ہے تو ہی 
ذاتِ رحیم یکتا 

اس حمد کے پہلے مصرعے پر اپنی تنقیدی نظر ڈالتے ہوئے محترم ضیا السلام ضیاء شادانی صاحب نے فرمایا کہ مصرع "تعریف سب ہیں تیری" یہاں' تعریف' واحد کا صیغہ ہے جبکہ 'ہیں' جمع کا صیغہ ہے، واحد کے صیغے کے ساتھ جمع کا صیغہ مناسب نہیں ہے، جبکہ محترم شمس الحق صاحب لکھنؤ انڈیا نے فرمایا کہ مجھے اس کلام میں کوئی مقام مشورہ نظر نہیں آتا کیونکہ تعریف کے ساتھ لفظ 'سب' جمع کی طرف اشارہ کرتا ہے اور اس طرح بہت مستعمل ہے 
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محترم ارشد مینا نگری صاحب انڈیا 
ظلم کا راج چار سو
آنکھ نم نظر لہو لہو 
کام ہو رہا وہ روبرو

کہہ چکے جو بات مصطفٰی 
فخرِ کائنات مصطفٰی 
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محترم علیم طاہر صاحب انڈیا 

ہے عطا کردہ فکر و فن تیرا
شکر کرتا ہے ادا، من، تیرا

ایک کن سے کیا جہاں تخلیق 
یہ زمیں تیری یہ گگن تیرا

اس حمد پر محترم ضیا شادانی صاحب نے مصرع "شکر کرتا ہے ادا من تیرا" پر اپنی تنقیدی رائے پیش کر تے ہو ئے یوں فرمایا کہ یہ مصرعہ اگر ایسے  "شکر کرتا ہے یوں بھی من میرا" کر لیا جائے تو بہت مناسب رہے-
مصرع "کھینچتا ہے مجھے اپنی جانب" کو "کھینچتا ہے مجھے تیری جانب" کر لیا جائے اور "ورد کرتی ہیں فضائیں طاہر" کو "ورد کرتی ہے یہ فضا طاہر" کرلیا جائے تو اشعار کا حسن نکھر جائے گا 
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محترم شہیر تہامی صاحب پاکستان 

چمکتی دھوپ اور سایا 
یہ صحرا، تشنگی، پانی
حصارِ ذات میں تیرے
یہ سب کچھ ہے تو کیوں فانی
رموزِ عشق کا مصدر 
خرد زادِ ہنر تو ہے
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محترم غلام احمد رضا قادری مھدی صاحب رامپوری انڈیا 

نبی کے روضے کی جالی کو تھام کر مھدی
میں اپنا سویا مقدّر جگانے آیا ہوں 
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محترم مصطفٰی دلکش صاحب مہاراشٹر انڈیا 

پھول کھلادے پتّھر میں شاخوں کو پھل دے اللہ 
دھرتی کو جل تھل کردے اتنا تو جل دے اللہ 
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محترمہ صبیحہ صدف صدیقی صاحبہ بھوپال انڈیا 

انتہا تو ہی ابتدا تو ہی 
میرے ہر درد کی دوا تو ہی
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محترم ابنِ ربّانی صاحب پاکستان 

ہاں احسانِ تقویم کی تفسیر وہ چہرہ 
گلزارِ بہشتی کی ہے تصویر وہ چہرہ 
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محترم اصغر شمیم صاحب کولکتہ انڈیا 
مدینے کی گلیوں میں گھر چاہتا ہوں 
وہ روضہء اقدس کا در چاہتا ہوں 

کہیں دل مرا اب یہ لگتا نہیں ہے 
مدینے کی شام و سحر چاہتا ہوں

دوسرے مصرعے میں' روضہء اقدس'کو محترم مختار تلہری صاحب نے غور کرنے کا مشورہ دیا 
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محترم خالد سروحی صاحب پاکستان 

اپنے در پر مجھے اب بلا لیجئے 
جی مچلتا ہے دیکھوں تمہارا نگر
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محترمہ نیّر رانی شفق صاحبہ پاکستان 

دیدار کی پیاسی ہوں دیدار عطا آقا
ہر سمت اندھیرے میں تھوڑی سی ضیا آقا
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محترم شوزیب کاشر صاحب آزاد کشمیر 

تو سیّدِ عالم ہے رفعنا لکَ ذکرک
پیارے تجھے کیا غم ہے رفعنا لکَ ذکرک

اس نعت میں حضور اکرم صلعم کو تو کہہ کر مخاطب کیا گیا ہے اس طرف ناقد نے اشارہ کیا ہے 
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محترمہ سیمہ گوہر صاحبہ رامپور انڈیا 

صرف اس رب سے محبت کیجے
جتنا ممکن ہو عبادت کیجے
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محترم ایڈووکیٹ متین طالب صاحب ناندورا انڈیا 

میں سرشار ہوں عشق میں مصطفٰی کے 
کہ بخشش کی صورت نکلنے لگی ہے 
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محترم مقیم مینا نگری صاحب انڈیا 

صبح ہوئی تو سارے پرندے ورد کریں تیرا
آتی جاتی سانس سانس سے ذکر چلے تیرا
تو ہی خدا ہے تو ہی خدا ہے تو ہی خدا میرا
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محترم ارسلان فیض کھوکھر صاحب پاکستان 

اب آرہی ہے پھر مجھے خوشبو گلاب کی 
دہلیز پر کھڑا ہوں رسالت مآب کی
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مشاعرہ رات 11 بجے تک بہت آب و تاب و بشاشت کے ساتھ چلتا رہا آخیر میں ناقد و استاد شاعر محترم ضیا شادانی صاحب نے حمدیہ و نعتیہ کلام پر تنقید کے سلسلے میں فرمایا کہ "نعتیہ و حمدیہ کلام میں تنقید کوئی معنی نہیں رکھتی، اس میں دو باتوں کا خیال رکھیں مفہوم کے اعتبار سے تو شاعر آزاد ہے کہ وہ اپنی مرضی سے کیا کہتا ہے لیکن 1-بحر کا لھذ' ضرورع ہے کہ مصرعہ بحر میں ہوں 2- احترام کے دائرے سے باہر نہ نکلیں 
اس کے بعد صدرِ محفل محترم شمس الحق صاحب لکھنؤی انڈیا نے اپنے خطاب میں فرمایا کہ 

بسم اللہ الرحمن الرحيم 

آج کا مشاعرہ بعنوانِ محفلِ حمد و نعت اختتام پذیر ہوا جسے آرگنائز کر رہے تھے محترم ارسلان فیض صاحب

نظامت کر رہے جناب مختار صاحب اور جناب ضیا شادنی صاحب

بہت شاندار اور بہت پر رونق رہا لا جواب کلام سن کو ملے 
عمدہ نظامت اور ہمارے مہمانِ خصوصی ہوں مہمانِ اعزازی سبھی نے شعرا کو خوب سراہا

میں آخر سب کو مبارکباد پیش کرتا ہوں اور اس ادراے اور تمام کارکنان کے  لیے دعا بھی کرتا ہوں آیے اختتام مجلس پر چند دعا بارگاہِ ربِ عظیم کے دربار میں مانگتے  کہ اے اللہ ہماری تمام کوشوں کو قبول فرما آمین کوتاہیوں کو معاف فرما آمین
ہمیں سعادتِ دارین سے ہمکنار فرما آمین
اے اللہ اپنی محبت اور رسول کی سچی محبت عطا فرما آمین
علم اور عمل میں اور زندگیوں میں برکت عطا فرما آمین
وآخر دعوانا ان الحمدللہ رب العالمین

از صدرِ مشاعرہ

اسی کے ساتھ ہی ادارے کے بانی و چیئرمین محترم توصیف ترنل صاحب نے مشاعرے کے ختم کا اعلان فرمایا

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